गुजरात दंगे के मामले में झूठी जानकारी देने के आरोप में शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो पूर्व आईपीएस अफसर संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। अहमदाबाद शहर की पुलिस अपराध शाखा के इंस्पेक्टर दर्शनसिंह बी बराड की शिकायत पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद गुजरात एटीएस ने मुंबई के जुहू पहुंचकर तीस्ता सीतलवाड़ को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया, वहीं अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी श्रीकुमार को अरेस्ट कर लिया है।
एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने जकिया जाफरी के जरिए कोर्ट में कई याचिकाएं लगाईं और एसआईटी प्रमुख और दूसरे आयोग को गलत जानकारियां दीं। जानकारी के मुताबिक गुजरात एटीएस की दो टीमें मुंबई पहुंचीं, एक टीम सांताक्रूज पुलिस स्टेशन गई तो दूसरी टीम मुंबई पुलिस के साथ तीस्ता सीतलवाड़ के जुहू स्थित घर गई। इसके बाद टीम उन्हें हिरासत में लेकर सांताक्रूज थाने पहुंच गई।
जानकारी के मुताबिक जब तीस्ता को टीम ने जीप में बैठाने की कोशिश की तो उसके ऑफिस के कर्मचारियों और समर्थकों की जांच टीम से बहस हुई। उन्होंने तीस्ता को जीप से ले जाने के लिए रोकने की भी कोशिश की ।
मुंबई पुलिस ने गुजरात पुलिस के दिए गए सभी दस्तावेजों की जांच की। अब उन्हें अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के ऑफिस लेकर आ रही है।
वहीं अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को गिरफ्तार कर लिया है। मालूम हो कि गुजरात दंगा मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान मामले को राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे।
दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार के सामने बयान दिया था जो कि निराधार और झूठे साबित हुए, क्योंकि जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए थे।
24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को रद्द कर दिया था। इस याचिका को जाकिया जाफरी ने दाखिल किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द करते हुए कहा था तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी।
