देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड में अवस्थित आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के तत्त्वावधान में संचालित भगवान शंकर आश्रम द्वारा विजयादशमी के पावन अवसर पर ' विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ ' धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अति दुर्लभ विशिष्ट अनुष्ठान में ऑन लाइन देश विदेश से लगभग 416 श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिनमें से 60 श्रद्धालु आश्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।
देहरादून में भगवान शंकर आश्रम ने विजयादशमी पर 'विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ' का आयोजन
ट्रस्ट के अध्यक्ष और आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता परमप्रज्ञ जगद्गुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज के पावन सानिध्य में कमल, गेंदे एवं गुलाब के असंख्य पुष्पों से विधिवत रूप से पुष्पार्चन संपन्न हुआ। इसके उपरांत भव्य, दिव्य एवं विशिष्ट विजय वाहिनी चण्डी महायज्ञ विधि विधान से संपन्न हुआ। शत्रुओं से रक्षा, संकटों के नाश, आर्थिक समृद्धि, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, ग्रह दोष से मुक्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति के संकल्प के साथ सभी भक्तों ने आहुतियाँ अर्पित की।

सनातन धर्म हर घर तक पहुंचे, हर भवन में मंत्रों की गूंज हो, इस संकल्प के साथ, गुरुदेव आर्यम के आह्वान पर फाउंडेशन द्वारा Google Meet सत्र किए जाते हैं। अमेरिका, स्विट्जरलैंड, लन्दन, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, दुबई एवं आदि देशों से भक्तजन न केवल जुड़ते हैं, बल्कि विधि-विधान से पूजा सम्पन्न करते हैं।

विजयादशमी असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व है। इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसी दिन देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का उत्सव भी मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों की शक्ति उपासना के पश्चात दशमी तिथि विजय के रूप में आती है।

माँ चण्डी, माँ दुर्गा का ही उग्र स्वरूप हैं, जिनकी महिमा का वर्णन दुर्गा सप्तशती में मिलता है, जिसे चण्डी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। विजय की अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में विजयादशमी पर माँ चण्डी का आह्वान विशेष फलदायी माना गया है।

हवन में पीली सरसों, काली सरसों, काले और सफेद तिल, सफेद और लाल चंदन, आम, अंजीर एवं अनार की समिधा, कमल गट्टा, इलायची, नाग केसर, जावित्री, अक्षत आदि पदार्थ प्रयुक्त हुए। गुरुदेव ने बताया कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्त्व रहता है।

गुरुदेव श्री आर्यम का कथन है कि पूजा में पदार्थों की संख्या से अधिक उनकी शुद्धता का महत्त्व है। पचास पदार्थों में दस नकली हों तो कोई लाभ नहीं, उससे अच्छा है कि पाँच ही पदार्थ हों किंतु पाँचों शुद्ध हों। बाज़ार में मिलने वाली मिठाइयों में रंग और रसायन होने के कारण उन्होंने भक्तों को घर में बना प्रसाद अथवा गुड़ और मिठाई अर्पित करने की सलाह दी।

पूजा के उपरांत आश्रम में भोजन प्रसादम का आयोजन हुआ, जिसे सभी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।

ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि देश विदेश में गुरुदेव आर्यम के सर्वाधिक दीक्षित शिष्य हैं। आर्यम जी महाराज सनातन एवं वैदिक काल के दुर्लभ एवं विशिष्ट पूजा पद्धतियों को पुनर्स्थापित कर रहे हैं। आर्यम जी गुरुदेव का कथन है कि "सही धार्मिक क्रिया, अनुशासन के साथ जब पूर्ण निष्ठा के साथ की जाती है तब ईश्वर उसका फल हमें जरूर देते हैं। ज्ञातव्य रहे कि आज गुरुदेव आर्यम की शिक्षाएं असंख्य लोगों के जीवन को रूपांतरित करने का कार्य कर रही हैं।

आज के इस अनुष्ठान को सफल बनाने में राकेश रघुवंशी,संध्या रघुवंशी, रमन आर्यम,प्रतिभा , उत्कर्ष, हर्षिता, जया शर्मा आदि का सहयोग रहा।