मुजफ्फरनगर। सदर बाजार के अस्पताल में बच्चा बदले जाने के मामले में डीएनए जांच का सहारा लेना पड़ा। रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले की स्थिति साफ हो सकी। रिपोर्ट में साफ हो गया है कि रोनी हरजीपुर गांव के राज सिंह के घर बेटी ने ही जन्म लिया था। नवजात और उसके पिता का सैंपल मैच हो गया है। सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने भी इसकी पुष्टि की है।
रोनी हरजीपुर निवासी राज सिंह अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा के बाद 18 फरवरी को अस्पताल के लिए लेकर चला था। रास्ते में प्रसव हो गया, जिस कारण नवजात को चोट लग गई। राज सिंह ने अपनी पत्नी को शामली रोड स्थित अस्पताल में भर्ती कराया, जबकि नवजात आरती को पंवार हॉस्टिपल में भर्ती कराया था। 28 फरवरी को राज सिंह की पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद 13 मार्च को राज सिंह नवजात को अस्पताल से अपने घर ले गया।
14 मार्च को वह दोबारा अस्पताल पहुंचा और आरोप लगाया कि उसने लडक़ा भर्ती कराया था, जबकि अस्पताल में बच्चा बदलकर लडक़ी दे दी गई। भाकियू के जिला उपाध्यक्ष विकास शर्मा अन्य लोगों के साथ अस्पताल पहुंचे और प्रदर्शन किया था। सिटी मजिस्ट्रेट अनूप सिंह की मौजूदगी में डीएनए टेस्ट पर सहमति बनी थी। पिछले दिनों नवजात और राज सिंह के ब्लड का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था। शनिवार को डॉ अजय पंवार ने बताया कि पिता और बच्ची का सैंपल मैच हो गया है।
सदर बाजार स्थित पंवार हॉस्पिटल के संचालक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय पंवार ने आरोप लगाया कि भाकियू नेता और जिला पंचायत सदस्य विकास शर्मा ने धरना.प्रदर्शन हटवाने के नाम पर ढाई लाख रुपये मांगे थे। महावीर चौक स्थित बैंक्वट हॉल में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. अजय पंवार और डॉ. आशीष बालियान ने कहा कि 14 फरवरी को बच्चा बदलने का झूठा आरोप लगाकर उनके अस्पताल पर प्रदर्शन किया गया।
