नई दिल्ली। पूरी दुनिया में रेव पार्टियों का चलन बड़ी तेजी से बढ़ता जा रहा है। 80 और 90 के दशक में ही इन पार्टियों की शुरुआत हो गई थी। अगर रेव पार्टी की बात करें तो इसका मतलब जोश और मौज मस्ती से भरी महफिलों से है। इन पार्टियों में धड़ल्ले से गैरकानूनी ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है।
गुपचुप तरीके से होने वाली इन पार्टियों में रईसजादे एंजॉय करते है। तेज म्यूजिक, डांस और नशा इन पार्टीज की जान होती है। यह पार्टी पूरी पूरी रात चलती है। ड्रग्स बेचने वालों के लिए ये पार्टियां किसी लाटरी से कम नहीं होती।खास बात है कि इन रेव पार्टियों में हर कोई शामिल नहीं हो सकता है। इनमें एंट्री के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है। यहां गांजा, चरस, कोकीन, हशीश, एलएसडी, मेफेड्रोन जैसे ड्रग्स का इस्तेमाल होता है। इन ड्रग्स का असर करीब 7 से 8 घंटों तक रह सकता है। रेव पार्टियों में ज्यादातर ड्रग्स इसके अयोजक ही उपलब्ध कराते हैं।
इनमें लड़के और लड़कियां सभी शामिल होते हैं।80 और 90 के दशक में दुनिया तेजी से रेव पार्टियों से वाकिफ हुई। हालांकि ऐसी पार्टियों की शुरुआत उससे करीब 20-30 साल पहले हो चुकी थी। लंदन में होने वाली बेहद जोशीली पार्टियों को ‘रेव’ कहा जाता है। अमेरिकी न्याय विभाग का एक दस्तावेज बताता है कि 1980 की डांस पार्टियों से ही रेव का चलन निकला। जैसे-जैसे तकनीक और ड्रग्स का जाल फैला, रेव पार्टियों की लोकप्रियता बढ़ती चली गई। भारत में रेव पार्टियों का चलन हिप्पियों ने गोवा में शुरू किया।
इसके बाद देश के कई शहरों में रेव पार्टियों का ट्रेंड बढ़ा। अब इंटरनेट की वजह से यह और भी आसान हो गई। इंस्टाग्राम अकांउट के जरिए इसकी एंट्री और संपर्क मिल जाते हैं।