मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट में भारतीय टीम को 184 रनों से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, मैच के दौरान सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के साथ हुए विवादित अंपायरिंग फैसले ने सबका ध्यान खींचा। भारत का कोई भी बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सका, जबकि यशस्वी ने शानदार संघर्ष दिखाया।
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस 71वां ओवर फेंक रहे थे। ओवर की पांचवीं गेंद पर यशस्वी ने पीछे की ओर शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद विकेटकीपर एलेक्स कैरी के हाथों में चली गई। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने आउट की अपील की, लेकिन मैदानी अंपायर ने नॉट आउट करार दिया।
इसके बाद कमिंस ने डीआरएस का सहारा लिया। रिप्ले में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि गेंद ने यशस्वी के बल्ले का किनारा लिया है या नहीं। स्निको मीटर ने भी किसी स्पष्ट हरकत का संकेत नहीं दिया। इसके बावजूद तीसरे अंपायर ने मैदानी अंपायर का फैसला पलटते हुए यशस्वी को आउट करार दिया। इस फैसले ने दर्शकों और कमेंटेटर्स को हैरान कर दिया। भारतीय बल्लेबाजी दिग्गज सुनील गावस्कर ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे विवादित निर्णयों से खेल की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने 340 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। जवाब में भारत ने खराब शुरुआत की और 33 रन के अंदर तीन विकेट गंवा दिए। इसके बाद यशस्वी और ऋषभ पंत ने पारी को संभालते हुए 88 रनों की साझेदारी की। हालांकि, पंत 30 रन बनाकर आउट हो गए, और इसके बाद भारत की पारी लड़खड़ा गई। यशस्वी ने 84 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन उनके आउट होने के बाद भारतीय टीम 200 रन तक भी नहीं पहुंच सकी।
भारत की बल्लेबाजी के विफल होने और विवादास्पद फैसले ने टीम को 184 रनों की बड़ी हार की ओर धकेल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में अपना दबदबा कायम रखा, जबकि भारतीय टीम को अपनी कमजोरियों पर काम करने की जरूरत है।
