मीरानपुर कटरा/शाहजहांपुर। यूं तो कस्बे का रामलीला आसपास के मेला एवं मंचन में बीसलपुर के बाद बड़ा माना जाता है | परंतु इस बार बड़ी बात है ,दो रामलीला कमेटियों का रामलीला कराने को लेकर विवाद | संज्ञान रहे पिछली वर्ष शालिग्राम गंगवार के निधन के बाद रामलीला कौन कराएगा ,यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया था | क्योंकि रामलीला से जमीन का जुड़ा विवाद काफी पुराना है |

कहा जाता है कि दान में रामलीला को दी गई जमीन अब करोड़ों की हो चुकी है | जिस पर कई भू माफियाओं की नजर है | इसलिए वे जुगत कर रामलीला को एनकेन प्रकारेण खत्म करने की मंशा रखते हैं | जिससे कि जमीन को लेकर उनका रास्ता साफ हो जाए | क्योंकि रामलीला की जमीन का जो फ्रंट है वह काफी लंबा ,टू साइड रोड से भी घरा हुआ है | काफी जमीन आदर्श विद्यालय प्रांगण में भी गई हुई है | इसलिए उसमें दुकानें व्यवसायिक निर्माण करने को लेकर कई लोगों की नजरें मौके पर गड़ी हुई थी |

आश्चर्य लगता है जिनको रामायण की चार चौपाइयां नहीं आती , कस्बे में स्थित राम के मंदिर कभी आना जाना होता नहीं ,राम मंदिर आंदोलन में जिनका कोई योगदान नहीं ,राम के प्रति उनकी आस्था भी कभी देखी नहीं गई अचानक वह राम भक्त बन रामलीला कमेटी के सर्वे सर्वा के तौर पर स्थापित हो रामलीला के मंचन को लेकर प्रशासन से पींगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं |

दोनों समितियां अपने अपने आपको असली समिति बनाने का दावा करने को लेकर घमासान कर रही हैं | और उधर प्रशासन भी जल्दबाजी में दिखाई दे रहा है | बस मीरानपुर कटरा की जनता आश्चर्य बोध में खड़ी है जनमानस के अंदर आक्रोश एवं भावनाओं को छले जाने का डर तो है ही | राम भक्तों की सरकार होने के बाद भी ,इस तरीके से समिति का विवाद और प्रशासन का मौन रवैया भी गंभीर है साथ ही जनमानस का कहना है ‘हुई है वही ,जो राम रचि राखा’ और पब्लिक है बाबू पब्लिक सब जानती है |