नई दिल्ली। कथक सम्राट बिरजू महाराज को जलेसर में बने घुंघरू ही पसंद थे। वह स्पेशल आर्डर देकर यहां से घुंघरू मंगाते थे। करीब आठ पहले ही 100 घुंघरू जलेसर से भेजे गए थे।
बिरजू महाराज को जलेसर के घुंघरुओं से विशेष लगाव था। वह अपनी प्रस्तुति के दौरान खासतौर पर जलेसर के बने घुंघरुओं को मंगाया करते थे। घुंघरू निर्माता और एक्सपोर्टर कृष्णगोपाल गुप्ता ने बताया कि बिरजू महाराज के निधन से गहरी क्षति पहुंची है। उन्हें जलेसर के घुंघरुओं से विशेष लगाव था। देश विदेश में कहीं भी बिरजू महाराज की कोई प्रस्तुति होती थी तो वह विशेष तौर पर जलेसर के घुंघरू मंगवाया करते थे। जलेसर के घुंघरुओं की अलग झंकार रहती थी।
उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के निधन से जलेसर के घुंघरुओं की खनक भी खामोश हो गई है।उन्होंने कहा कि बिरजू महाराज के पैरों में बंधने के बाद जलेसर के घुंघरू जीवंत हो उठते थे। मालूम हो कि जलेसर के बने घुंघरू की देश में ही नहीं विदेशों में भी डिमांड रहती है। इसमें कनाडा, यूएस, जर्मनी, इंग्लैंड समेत पूरी दुनिया मे सप्लाई होते हैं।
