पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई। इस पर दुनिया भर से जो प्रतिक्रिया आ रही है। उसने पाकिस्तान के रोंगटे खड़े हो गए हैं। पाकिस्तान के लोग ही नहीं बल्कि वहां की सरकार भी दहशत में आ गई है। पाकिस्तान की आदत रही है कि खुद का डर छिपाने के लिए हमेशा उटपटांग बयान देता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं चलेगा। वहीं के एक पत्रकार ने तो यहां तक लिख दिया कि कहीं पाकिस्तान की हालत गाजा की तरह से न हो जाए। आइए जानते हैं कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के लोग क्या कह रहे हैं।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जिस तरह की प्रतिक्रिया पाकिस्तान से आ रही है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि इस हमले ने वहां के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को असहज कर दिया है। पाकिस्तान के भीतर से उठ रही चिंताजनक आवाज़ें इस ओर इशारा कर रही हैं कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि और ज्यादा संकट में पड़ सकती है, ख़ासकर जब तुलना गाज़ा जैसी स्थिति से की जाने लगे।

कुछ अहम बिंदु

  1. अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर:
    हमले के समय प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब में और अमेरिकी उपराष्ट्रपति भारत में थे, जो दर्शाता है कि यह हमला केवल भारत की आंतरिक स्थिति ही नहीं, बल्कि उसके वैश्विक रिश्तों और छवि पर भी असर डालने की कोशिश हो सकती है।
  2. पाकिस्तानी रिएक्शन में घबराहट:
    • अबdul Basit जैसे पूर्व राजनयिक खुलेआम “मुँहतोड़ जवाब” की बात कर रहे हैं।
    • वहीं शेरी रहमान का बयान एक तरह से “डिफेंसिव मोड” में आता है, जो भारत पर आरोपों को सामान्य प्रतिक्रिया बता रही हैं।
    • उमर अज़हर और आयशा सिद्दीक़ा जैसे विश्लेषकों का सुर बदल गया है—वे अब जनरल मुनीर की उग्र भाषा पर सवाल उठा रहे हैं।
  3. जनरल मुनीर का भाषण विवादों में:
    उनका “हिंदू-मुसलमान फ़र्क़” और “कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा” जैसी बातों वाला भाषण अब उल्टा पड़ता दिख रहा है। यहां तक कि पाकिस्तान के अंदर से ही यह कहा जा रहा है कि ऐसी बयानबाज़ी से नफ़रत को बढ़ावा मिलेगा।
  4. गाज़ा से तुलना क्यों?
    पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने पहलगाम हमले को गाज़ा संकट की शुरुआत जैसी चेतावनी बताई है। यानी अगर भारत ने कोई कड़ा कदम उठाया, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
  5. भारत की संभावित प्रतिक्रिया:
    शशांक जोशी जैसे विश्लेषक खुले तौर पर कह रहे हैं कि भारत मई के आख़िरी हफ्ते में सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ होगा।

इस घटना ने न केवल भारत की सुरक्षा नीति को पुनः केंद्र में ला दिया है, बल्कि पाकिस्तान के आंतरिक विमर्श में भी फूट डाल दी है। अब देखना होगा कि भारत इस हमले के जवाब में किस प्रकार की कार्रवाई करता है—कूटनीतिक, सैन्य या दोनों।