बिजनौर। विलुप्त प्राय वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी में पुलिस ने 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि तीन आरोपी अभी फरार हैं। पकड़े गए आरोपियों में खरीदार और बेचने वाले दोनों गुट शामिल है। पैंगोलिन की सौदेबाजी एक करोड़ रुपये में हुई थी। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। रविवार की शाम 8:30 बजे एसओजी और नगीना देहात पुलिस ने वन क्षेत्र के पास गांव बनोवाला में मस्तान के डेरे पर दबिश दी। डेरे पर विलुप्त प्राय वन्यजीव पैंगोलिन की खरीद फरोख्त के लिए सौदेबाजी चल रही थी। बिहार से आए छह तस्कर एक करोड़ में पैंगोलिन खरीद रहे थे।

तभी पुलिस ने सभी 15 आरोपियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में छह बिहार, एक हरियाणा, एक मेरठ और सात बिजनौर के ही रहने वाले हैं। पूछताछ में साफ हुआ कि पैंगोलिन को मस्तान और साबिर ने कौड़िया रेंज के मोहनवाली आरक्षित वन क्षेत्र से चार पांच दिन पहले पकड़ा था। पकड़ने के बाद मस्तान और साबिर ने टांडा के पूर्व प्रधान फुरकान से संपर्क साधा। फुरकान ने नजीबाबाद के परवेज और सुमित चौहान और बिजनौर के संजीव त्यागी से संपर्क किया।

इसके बाद संजीव त्यागी ने हरियाणा के राजेश कुमार से बात की। राजेश ने बिहार के रहने वाले तनवीर आलम से संपर्क किया। तनवीर आलम ने बिहार एसटीएफ के एक सिपाही समेत अपने छह लोगों को बिजनौर भेज दिया। सौदेबाजी चल ही रही थी, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। इनके पास से वन्यजीव पैंगोलिन, 11 मोबाइल फोन, तीन कीपैड, तीन कार और करीब पंद्रह हजार रुपये बरामद हुए हैं। पकड़े आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज करते हुए चालान कर दिया गया।

चींटी और दीमक होता है पैंगोलिन का मुख्य आहार, कहा जाता है सोल्हू सांप
जिले में पैंगोलिन काफी संख्या में मिलता है। भूड़ और गंगा के खादर में ये आराम से दिख जाते हैं। हालांकि पैंगोलिन की जिले में अब तक गणना नहीं की गई है। इसे आम भाषा में सोल्हू सांप कहा जाता है। यह पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी जीव है। चींटी और दीमक इसका मुख्य आहार होती हैं। ये दीमक को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करते हैं। अगर ये दीमकों को न खाएं तो दीमकों की संख्या बहुत बढ़ जाएगी और वे पेड़ों को नुकसान पहुंचाएंगी।

पैंगोलिन के शरीर पर शल्क होते हैं और खतरा महसूस होने पर यह सिकुड़कर फुटबॉल की तरह बन जाता है। बिजनौर में अमानगढ़ वन रेंज के अलावा रेतीले व गंगा क्षेत्र में ये काफी संख्या में मिलते हैं। यह दुर्लभ प्रजाति में शामिल है। पहले गांवों के आसपास ये आराम से दिख जाते थे, लेकिन अब आबादी बढ़ने से इनके रहने का क्षेत्र काफी कम हुआ है। गांव वाले इस जीव का शिकार भी नहीं करते हैं और जाने देते हैं। शायद पहली बार इस जीव की तस्करी का मामला सामने आया है। इसकी हड्डी और मांस को शक्तिवर्धक दवाइयों मेें प्रयोग किया जाता है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के अनुसार वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। पैंगोलिन की संख्या जिले में काफी है। आमतौर पर जिले में इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है।

शेड्यूल वन में आता है पैंगोलिन
ट्रैफिक इंडिया के डायरेक्ट साकेश बडोला ने बताया कि पैंगोलिन शेड्यूल वन में आता है। इसके शिकार या तस्करी के मामले में पहली बार पकड़े जाने पर तीन और दूसरी बार पकड़े जाने पर सात साल की सजा हो सकती है।

विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे वन्यजीव पैंगोलिन की तस्करी करते हुए 15 आरोपियों को पकड़ा गया है। आरोपी बिहार, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। इनमें एक बिहार एसटीएफ का सिपाही भी है, जोकि एक महीने की छुट्टी पर चल रहा है। डीएफओ और अन्य वन अधिकारियों को सूचना दे दी गई है

  • डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी