रंगारंग समारोह के साथ 38वें राष्ट्रीय खेलों का आगाज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार की शाम रजत जयंती खेल परिसर में राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत की। हमारे प्रदेश के खेल इतिहास में यह अब तक सबसे बड़ा आयोजन है। इस आयोजन को संभव बनाने में सबसे अहम भूमिका रही राज्य की खेल मंत्री रेखा आर्या की। खेल शुरू होने से पहले खेल मंत्री ने प्रदेश के 12 शहरों में हर आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और प्रदेश के लिए इन खेलों में शिरकत करने वाले हर खिलाड़ी से रूबरू बात करके उनकी तैयारियों का जायजा लिया। उद‌्घाटन के मौके पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने हमारे संवाददाता राजकुमार दक्ष से विशेष बातचीत की।

राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में आप हमारी टीमों से कैसे प्रदर्शन की अपेक्षा कर रही हैं?

देखिए, हमने पहले ही कहा था कि इन राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन अब तक के सभी राष्ट्रीय खेलों से ज्यादा भव्य रहेगा और आपने मंगलवार शाम को स्वयं भी इसे देखा। मेरा मानना है कि अब जबकि खेल स्पर्धाएं शुरू हो गयी हैं तो निश्चित रूप से उत्तराखंड की टीमें इस बार राष्ट्रीय खेलों के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने जा रही हैं। हमारी अपनी टीमों से यह अपेक्षा है कि वह हमें पदक तालिका में पहले स्थान पर लाकर खड़ा करें या कम से कम टॉप फाइव में हमारे प्रदेश का नाम जरूर आना चाहिए।

यह बात मैं बिना किसी आधार के नहीं कह रही हूं… पिछले दो महीने में मैं प्रदेश की उन सभी जगह पर गई हूं जहां खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए शिविर चल रहे हैं। मैंने हजारों खिलाड़ियों से रूबरू होकर बात की है, उनसे उनके अनुभव जाने हैं, उन्हें खाना-पीना कैसा मिल रहा है, उनकी कोचिंग कैसी हो रही है, इस बारे में बात की है। मुझे अपने खिलाड़ियों में जो आत्मविश्वास दिखा, उसी के आधार पर मैं कह रही हूं कि हमारी टीमों का प्रदर्शन इन खेलों में बेस्ट रहने वाला है।

एक खेल मंत्री के तौर पर राष्ट्रीय खेल का आयोजन कितना चुनौती भरा था?

सीमित संसाधन वाले राज्य में नेशनल गेम्स का आयोजन करना निश्चित रूप से बड़ी चुनौती थी, लेकिन हमने इस चुनौती को स्वीकार किया और इस मिशन को पूरा करने के लिए पूरे मनोयोग से जुट गए। प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं जुटाने के लिए हमने कोई कसर बाकी नहीं रखी और संभवत यह पहली बार हो रहा है कि राष्ट्रीय खेलों में मेजबान राज्य सारे इवेंट अपने प्रदेश में ही करने में सक्षम हो पाया है। पिछले राष्ट्रीय खेलों में भी यह देखने को मिला था कि कुछ इवेंट मेजबान प्रदेश के बाहर कराने पड़े थे, क्योंकि उन खेलों को कराने के लिए जरूरी खेल सुविधाओं की कमी थी, लेकिन हम सभी प्रतियोगिताएं अपने प्रदेश में करा रहे हैं। यह प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

जो खेल अवस्थापनाएं राज्य ने बनाई हैं, उनकी भविष्य में देख-देख कैसे होगी?

पहले हमसे सवाल होता था कि नेशनल गेम्स के लिए जरूरी हम खेल सुविधाएं जुटा भी कर पाएंगे या नहीं? लेकिन अब सवाल खेल सुविधाओं के रखरखाव को लेकर है, यह अपेक्षाओं का बदल जाना भी एक खेल मंत्री के रूप में मेरे लिए सुखद अहसास है। मैं आपको आश्वस्त करना चाहती हूं कि हमने जो खेल ढांचा खड़ा किया है, भविष्य में उसे सुरक्षित और सुचारू रखने के लिए पहले से ही नीति तैयार कर ली है। हमारी आने वाली पीढ़ियां, हमारे जो युवा खिलाड़ी खेलों के क्षेत्र में नाम करना चाहते हैं, वह सब इन सुविधाओं का फायदा उठाकर स्तरीय तैयारी कर पाएंगे। हमारा अगला मकसद यही है कि हमारे प्रदेश से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकले, जिससे दुनिया देवभूमि को खेल भूमि के नाम से भी पहचानें।

इन राष्ट्रीय खेलों के बाद उत्तराखंड में खिलाड़ियों के लिए क्या बदलाव आएगा?

राष्ट्रीय खेल निश्चित रूप से उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहे हैं। हमने खिलाड़ियों के लिए जिस तरह की नीतियां बनाई हैं, उनसे भी प्रदेश में खेलों को बहुत बढ़ावा मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हमने यह सुनिश्चित किया है कि हम सिर्फ पदक जीतने के बाद ही खिलाड़ियों को इनाम से नहीं नवाजेंगे, बल्कि जिस वक्त खिलाड़ी तैयारी कर रहा हो, उस समय भी सरकार एक अभिभावक के तौर पर खिलाड़ी के साथ खड़ी होगी।

हम चयनित खिलाड़ियों को स्कूलिंग के समय से ही खेल छात्रवृत्ति दे रहे हैं, जिससे कि उसे अपनी डाइट, ट्रेनिंग और खेल उपकरण जुटाने में मदद मिल रही है। हमारी सरकार ने सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है। आगामी राष्ट्रीय खेलों में जो भी खिलाड़ी पदक जीतेंगे, उन्हें आउट ऑफ टर्म सरकारी नौकरी दी जाएगी। साथ ही इन राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले हमारे खिलाड़ियों के लिए जो इनाम राशि हमने रखी है, उतनी इनाम राशि आमतौर पर देश की किसी भी राज्य में शायद देखने को ना मिले।

राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने पहुंचे दूसरे प्रदेशों के खिलाड़ियों के लिए क्या सुविधाएं दी गई हैं?

खिलाड़ियों, उनके कोच और सपोर्टिंग स्टाफ के रहने खाने और आने-जाने के लिए हमने उच्च कोटि की व्यवस्थाएं की हैं। सभी आयोजन स्थलों पर अच्छी श्रेणी के होटल बुक किए गए हैं। हमने अपने कंट्रोल रूम के जरिये एक-एक खिलाड़ी को फोन करके उनके आने, ठहरने और आवागमन की सुविधाओं की जानकारी व्यक्तिगत रूप से दी है। शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा, जब इतनी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से फोन किए गए हैं। हमने इसका भी ध्यान रखा है कि खिलाड़ियों को उनकी पसंद के व्यंजन मिले। मैं आपको आश्वस्त करना चाहती हूं कि हमारे जितने भी मेहमान इन खेलों के लिए उत्तराखंड आ रहे हैं, वह हमारे आतिथ्य की सुखद यादें लेकर ही वापस जाएंगे।

प्रदेश में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से क्या दूसरे क्षेत्रों में भी कुछ बदलेगा?

हमने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन स्थलों को जिस तरह विकेंद्रित किया है, उसका एक मकसद यह भी है कि देशभर के खिलाड़ी और अन्य लोग उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य को जाने, यहां की संस्कृति को समझें, खिलाड़ी और उनका सपोर्टिंग स्टॉफ मिलाकर तकरीबन 15000 से ज्यादा लोग उत्तराखंड में आ रहे हैं, जब यह अपने प्रदेशों में वापस जाएंगे और यहां के सौंदर्य, यहां के मंदिरो-धार्मिक स्थलों और यहां के कल्चर के बारे में अपने परिजनों को, पड़ोसियों को और साथियों को बताएंगे तो निश्चित रूप से उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को इससे दीर्घकालिक फायदा होने जा रहा है।

प्रदेश के लोगों को राष्ट्रीय खेलों को लेकर क्या संदेश देना चाहेंगी?

खेल स्पर्धाएं शुरू हो चुकी हैं, मैं प्रदेश की जनता से यही कहना चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में खेल मैदानों में पहुंचे और अपनी टीम का उत्साह बढ़ाएं। साथ ही देशभर से जो मेहमान देवभूमि पहुंचे हैं, उनकी आवभगत में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि हम राष्ट्रीय खेलों को सिर्फ सरकार के आयोजन की तरह नहीं देख रहे हैं। बल्कि यह एक जन आयोजन है और प्रदेश का हर नागरिक मेजबान की भूमिका में है।