नई दिल्ली। यूपीआई पेमेंट करने पर कोई शुल्क लगेगा कि नहीं, इसको अब वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस ;यूपीआइ एक डिजिटल सार्वजनिक वस्तु है और सरकार का इस पर किसी तरह का शुल्क लगाने का इरादा नहीं है। दरअसल, आरबीआइ ने कुछ दिनों पहले भुगतान प्रणाली पर एक परामर्श पत्र जारी किया था और विभिन्न हितधारकों से उस पर सुझाव मांगे थे। इसके बाद इस तरह की चर्चा तेज हो गई थी कि केंद्र सरकार गूगल पेए पेटीएम और फोन पे जैसे यूपीआइ भुगतान प्रणाली पर चार्ज लगा सकती है।

वर्तमान में यूपीआइ के माध्यम से किए गए लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगता है। वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा कि यूपीआइ ने अर्थव्यवस्था को बहुत लाभ पहुंचाया है। सरकार इसके जरिये भुगतान पर शुल्क लगाने पर विचार नहीं कर रही है। जहां तक ट्रांजेक्शन के दौरान लगने वाली लागत की बात है तो सर्विस प्रोवाइडरों की इस चिंता को किसी और तरीके से पूरा किया जाएगा।

आरबीआइ ने अपने परामर्श पत्र में यूपीआइ के जरिये फंड ट्रांसफर को आइएमपीएस जैसा ही माना है और इसलिए यह तर्क दिया जा रहा है कि जिस तरह आइएमपीएस में शुल्क लिया जाता है। ठीक उसी तरह यूपीआइ के जरिये फंड ट्रांसफर पर शुल्क लिया जाए।

एक अन्य ट्वीट में वित्त मंत्रालय द्वारा कहा गया कि सरकार ने पिछले साल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की थी और इस वर्ष भी इस तरह के भुगतान प्लेटफार्मों को प्रोत्साहित करने की घोषणा की है। सरकार ने एक जनवरी 2020 से यूपीआइ लेनदेन के लिए जीरो चार्ज फ्रेमवर्क को अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि यूपीआइ में यूजर और व्यापारियों पर किसी तरह का शुल्क नहीं है।