संयुक्त राष्ट्र की ओर से जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्लासगो में होने जा रही सीओपी (कॉन्फ्रेंसॉफपार्टीज) -26 से पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जलवायु बदलाव के मुद्दे पर दुनिया न सिर्फ गलत राह पर आगे बढ़ रही है, बल्कि तबाही के किनारे पर है। मानवता को बचाने के लिए अंतिम बड़े साहसिक फैसले लेने की जरूरत है। 31 अक्टूबर से शुरू होने वाले सीओपी 26 में पेरिस समझौते और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के लक्ष्यों की दिशा में तेजी लाने के लिए सभी देशों को साथ लाने का प्रयास किया जाएगा।
अब्दुल्ला शाहिद ने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि शिखर सम्मेलन के बाद, दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान को लेकर पहले की तुलना में कहीं अधिक दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेगी। सभी देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) पहले से कहीं अधिक दृढ़ और महत्वाकांक्षी होंगे और ग्लासगो से सभी नेता सामूहिक रूप से संदेश देंगे कि सभी मिलकर मानवता को बचाएंगे।
दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन की भयानक स्थिति के बीच, शाहिद ने कहा कि वे युवाओं की निराशा को समझ सकते हैं, क्योंकि वे इस ग्रह के वारिस हैं और बहुत जल्द इसे लेकर वे खुद निर्णय लेने वाले होंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि युवा मानवता में उनका विश्वास बनाए रखें। वहीं, शिखर सम्मेलन से पहले एक उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा कि उनकी उम्मीदें अंध आशावाद में निहित नहीं है। वे मालदीव से हैं, जो ऐसा देश जिसका अस्तित्व समुद्र के बढ़ते स्तर से खतरे में है। उन्होंने कहा था कि हमारे लोग इस खतरे से वाकिफ हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 100 अरब डॉलर प्रतिवर्ष के वैश्विक जलावायु वित्त के लक्ष्य को भी अब-तक हासिल नहीं किया जा सका है। विकसित देश अपने इस संकल्प को पूरा करने में तीन वर्ष पीछे चल रहे हैं। इसके 2023 से पहले पूरे होने की संभावना नहीं दिख रही है, जबकि जरूरत इस बात की है 2030 तक विकासशील देशों को कम से कम एक हजार अरब डॉलर की सहायता की गारंटी मिले।
वहीं, उच्चस्तरीय बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियों गुटेरेस ने कहा कि दुनिया में प्रदूषण हर वर्ष करीब 90 लाख लोगों की जान ले रहा है। इससे बचना तभी संभव है जब दुनिया के नेता ग्लासगो में आकर तय करें इस दशक के अंत तक वैश्विक उत्सर्जन को 2010 के स्तर की तुलना में 45 फीसदी कम पाएं और 2050 तक वैश्विक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन की स्थिति हासिल करें।
