बिजनौर। यदि आपका बच्चा मोबाइल व टेबलेट पर ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान गेम आदि खेलने का शौकीन है और आप उसे ऐसा करने से न केवल रोकते हैं, बल्कि डांटते या पीटते हैं तो यह खबर सिर्फ आपके लिए है। नजीबाबाद में एक पिता ने कक्षा छह में पढ़ने वाले अपने बेटे को ज्यादा मोबाइल देखने पर डांटा तो वह नाराज होकर घर छोड़कर चला गया। काफी तलाश करने पर भी बच्चे का पता नहीं चला। बाद में एक सराफा व्यापारी ने बच्चे को उसके पिता के सुपुर्द किया।
बुधवार की सुबह नगीना में करीब दस वर्ष का एक बच्चा गांधी मूर्ति के निकट स्थित एक लॉज पर रुकने के लिए रिक्शा से पहुंचा। लॉज मैनेजर ने इसकी सूचना लॉज स्वामी के पुत्र सराफा व्यापारी सुयश अग्रवाल को दी। जब इतनी कम उम्र के छात्र द्वारा होटल पर ठहरने आने की सूचना उन्हें मिली तो उन्होंने उसे अपने घर बुला लिया तथा बच्चे से नगीना होटल में ठहरने का कारण पूछा। सुयश बताते हैं कि जब बच्चे ने उन्हें अपनी पूरी आपबीती सुनाई है तो उन्हें बड़ी हैरानी हुई। बच्चे ने बताया कि वह क्षेत्र के एक नामचीन पब्लिक स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ाई करता है व उसके पिता इनकम टैक्स व सेल टैक्स का काम करते है। माता एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं।
उसके पिता उसे मोबाइल व टेबलेट पर गेम खेलने पर पीटते हैं, इससे नाराज होकर वह प्राइवेट बस द्वारा नगीना पहुंच गया। वह बार-बार सुयश से अपने यहां किसी काम पर लगाने की गुहार करता रहा तथा परिवार का मोबाइल नंबर देने से बचता रहा। सुयश के प्यार से समझाने के बाद बच्चा अपनी मां का मोबाइल नंबर देने के लिए राजी हुआ। सुयश ने जब उसकी मां को मोबाइल पर सूचना दी कि उनका बच्चा नगीना पहुंच गया है तो वह बुरी तरह घबरा गईं। मां की सूचना पर पिता बच्चे को लेने नगीना पहुंच गए तथा बच्चे को अपने साथ ले गए।
उन्होंने बताया कि बच्चा दिन भर मोबाइल/टेबलेट देखने पर लगा रहता है। इस कारण उन्होंने कई बार उसे डांटा था। वह इस बात को सोच कर परेशान दिखे की यदि बच्चा गलत हाथों में चला जाता तो क्या होता। उन्होंने सुयश अग्रवाल के मानवता पूर्ण कार्य की प्रशंसा की।
इस बारे में शिक्षाविद् परवेज़ आदिल माही कहते हैं कि अपने बच्चों को मोबाइल/ टेबलेट देखने से रोकने से पहले हर माता-पिता को खुद भी इस पर अंकुश लगाना होगा।उनका मानना है कि घर पर रहने के दौरान माता-पिता द्वारा भी अधिकतर समय मोबाइल पर लगे रहने के कारण बच्चे भी मोबाइल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।
