गाजियाबाद। शीतलहर के कारण ब्रेन हैमरेज के मामले बढ़ गए हैं। पिछले पांच दिनों में 35 लोगों को ब्रेन स्ट्रोक हुआ है। 30 का अलग-अलग निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि एमएमजी अस्पताल में पहुंचे पांच मरीजों को इलाज की व्यवस्था न होने से रेफर कर दिया गया। यशोदा अस्पताल नेहरू नगर और कौशांबी में अब तक 30 मरीज आ चुके हैं। 10 दिन पहले एक या दो मामले ही थे। अधिकांश लोगों को ब्रेन स्ट्रोक सुबह चार से छह बजे के बीच हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि जनवरी तक हृदय और मधुमेह रोगियों को विशेष सावधानी की जरूरत है, क्योंकि इन्हें परेशानी अधिक होती है।

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरविंद डोगरा का कहना है कि सुबह सोकर उठने पर अचानक रक्त संचार बढ़ जाता है। ऐसे में मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होता है तो कुछ कोशिकाएं तुरंत मर जाती हैं और शेष कोशिकाओं के मरने का खतरा पैदा हो जाता है। समय पर दवा देकर क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बचाया जा सकता है। आघात के शुरू होने के तीन घंटे के भीतर खून के थक्कों को घोलने वाले टीपीए (टिश्यू प्लाज़्मिनोजेन एक्टिवेटर) देकर इन कोशिकाओं में रक्त आपूर्ति बहाल की जा सकती है।

फैलने-सिकुड़ने से फट जाती हैं नसें
बार-बार ठंड व गर्मी के संपर्क में आने से त्वचा के पास की नसें फैलती-सिकुड़ती हैं। इससे व्यक्ति को सर्दी लगती है। इस दौरान नसों के फटने का डर रहता है। सर्दी लगने पर संक्रमण होने की भी आशंका रहती है। सुबह सैर करना दिल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। बच्चों व बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस वजह से सर्दी-जुकाम, बुखार, नाक बंद होना, सांस में परेशानी, खराश, सिरदर्द व थकान की समस्या हो जाती है।

मस्तिष्क में खून का बहाव बाधित होने से स्ट्रोक
लकवा होने का मुख्य कारण होता है, मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई रक्त वाहिका फट जाती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं के आसपास खून भर जाता है। रक्त का प्रवाह कम हो जाता है या स्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि मस्तिष्क का दौरा (ब्रेन हैमरेज) पड़ गया है। पक्षाघात में शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है। सिफ़ॱर चेहरे या एक बांह या एक पैर पर लकवा मार सकता है या दुर्बलता आ सकती है – डॉ. आलोक रंजन, फिजिशियन एमएमजी अस्पताल।

ऑक्सीजन न मिलने से मर जाती हैं दिमाग की कोशिकाएं
मस्तिष्क में अपर्याप्त रक्त आपूर्ति की स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए ऑक्सीजन और पोषण के अभाव में स्थानिक रक्तता (इस्कीमिक स्ट्रोक) हो जाता है। इससे कोशिकाएं मर जाती है। क्षतिग्रस्त कोशिका में तरल युक्त गुहिका उनकी जगह ले लेती है। जिस व्यक्ति के मस्तिष्क के बाएं तरफ (हेमिस्फीयर) में पक्षाघात लगता है, उसके दाएं अंग में लकवा मारता है – डॉ. राकेश कुमार, न्यूरोफिजिशियन।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण

  • शरीर के एक हिस्से पर लकवा मार जाना
  • चेहरा टेढ़ा हो जाना
  • हाथ या पैर का सुन्न होना
  • बोलने व देखने में दिक्कत होना
  • चक्कर व उल्टियां होना
  • तेज सिरदर्द

इन्हें सतर्क रहने की जरूरत

  • 50 से अधिक उम्र के लोग, उम्रदराज, मधुमेह, कॉलेस्ट्रॉल, रक्तचाप के मरीज
  • स्मोकिंग, शराब पीने वाले वालों को भी अधिक खतरा।
  • ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री होने पर इसकी संभावना 50% तक बढ़ जाती है।

ऐसे बचे

  • नियमित योग करें।
  • पानी की कमी न हो दें।
  • रोजाना व्यायाम करें।