देहरादून। देश में सबसे कम वायु प्रदूषण वाले शहरों में शुमार देहरादून की हवा अधिक वाहनों के कारण खराब होने लगी है। खासकर दमा व सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के साथ ही सेहतमंद लोगों के लिए भी यह खबर सावधान करने वाली है। दीपावली पर आतिशबाजी के पहले ही राजधानी दून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। शहर के घंटाघर क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) चार दिन पहले 159 दर्ज किया गया। दो दिन पहले यह आंकड़ा बढ़कर 167 पहुंच गया। हरिद्वार में भी एक्यूआई का स्तर बढ़ना शुरू हो गया हैं। तीन दिन पहले हरिद्वार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 173 था। दो दिन पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा 190 पहुंच गया। काशीपुर में फिलहाल यह 109 दर्ज किया गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार आने वालों दिनों में आतिशबाजी के बाद आंकड़ा 300 के पार कर सकता है जो सेहत के लिए खतरनाक है। चार श्रेणियों में की जा रही मॉनिटरिंग
एयर क्वालिटी इंडेक्स की चार चरणों में मानीटरिग की जाती है। शून्य से लेकर 50 तक की एयर क्वालिटी इंडेक्स को सेहत के लिए ठीक माना जाता है। 51 से लेकर 100 तक एयर क्वालिटी इंडेक्स को संतोषजनक, 101 से लेकर 200 तक को माडरेट व 200 से लेकर 300 को खराब श्रेणी, 301 से लेकर 400 तक को बहुत खराब और 401 से ऊपर के एयर इंडेक्स होने होने पर प्रदूषण के लिहाज से सबसे खतरनाक माना जाता है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि के मुताबिक इस बार राजधानी दून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, काशीपुर और उधमसिंह नगर में प्रदूषण स्तर की मानीटरिंग शुरू कर दी गई है। निजी कंपनी के विशेषज्ञों द्वारा एयर क्वालिटी इंडेक्स की मॉनिटरिंग को लेकर राजधानी में दो स्थानों पर और बाकी शहरों में एक-एक स्थानों पर मॉनिटर स्टेशन स्थापित किए गए हैं। ध्वनि प्रदूषण की एक सप्ताह और वायु प्रदूषण की 15 दिन तक मानिटरिंग की जाएगी।
दीपावली पर सतर्क रहें दमा और सांस के रोगी, सांस लेने में हो सकती है दिक्कत
देहरादून। आतिशबाजी से दमा और सांस रोगियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ओपीडी में पहुंच रहे कई मरीज सांस लेने में दिक्कत की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे मरीजों को समय पर इलाज के साथ खास एहतियात बरतने की जरूरत है। राजकीय दून अस्पताल के वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. अंकित अग्रवाल के अनुसार दीपावली से पहले और दीपावली के कुछ दिन बाद तक दमा व सांस रोगियों के दिक्कतें बढ़ जाती हैं। आतिशबाजी के चलते एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा बहुत अधिक बढ़ जाने की वजह की वजह से सांस रोगियों के साथ सेहतमंद लोगों की भी स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में लोगों को थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे में जिन्हें दमा की शिकायत या सांस लेने की दिक्कत है तो ऐसे लोगों को दीपावली पर बहुत अधिक बाहर निकलने के बजाय घर में ही रहने की जरूरत है। बुजुर्ग जो दमा रोगी हैं और दवा ले रहे हैं तो वे लापरवाही न बरतें। समय पर अपनी सभी दवाइयां लेते रहें।
